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Bihar News: रामगढ़वा में मछली विक्रेताओं से अवैध वसूली का आरोप, विरोध करने पर पुलिस कार्रवाई पर उठा सवाल

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पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा में पुलिस पर मछली विक्रेताओं से अवैध वसूली और विरोध करने पर कार्रवाई के आरोप लगे हैं। वीआईपी नेता देव ज्योति ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

पूर्वी चंपारण/आलम की खबर:पूर्वी चंपारण जिले के रामगढ़वा थाना क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय मछली विक्रेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी उनसे जबरन मछली लेते हैं और विरोध करने पर न केवल मारपीट की जाती है, बल्कि झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाती है। इस पूरे प्रकरण को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और मामले ने तूल पकड़ लिया है।

इस विवाद को लेकर Vikassheel Insaan Party के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता Dev Jyoti ने खुलकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि रामगढ़वा के एक स्थानीय मछली बाजार में लंबे समय से पुलिसकर्मियों द्वारा बिना भुगतान किए मछली लेने की शिकायतें सामने आ रही थीं। विक्रेताओं का आरोप है कि यह एक तरह की अवैध वसूली है, जिसे वे मजबूरी में सहन करते रहे। लेकिन 9 फरवरी को मामला उस वक्त बिगड़ गया, जब कई मछली विक्रेताओं ने एकजुट होकर इसका विरोध किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए। आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने अन्य जवानों को मौके पर बुला लिया और इसके बाद कथित तौर पर लाठी-डंडों से विक्रेताओं की पिटाई की गई। इस घटना से बाजार में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग घायल भी हुए।

सड़क जाम और बढ़ा विवाद

घटना के बाद गुस्साए मछली विक्रेताओं और स्थानीय लोगों ने विरोध स्वरूप राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। सड़क जाम के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और इलाके में तनाव का माहौल बन गया। लोगों का कहना था कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे अपना विरोध जारी रखेंगे।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। हालांकि इस दौरान हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए और पुलिस तथा स्थानीय लोगों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।

कई लोगों को जेल भेजे जाने का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया कि विरोध में शामिल 20 से अधिक मछली विक्रेताओं को विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनका इस विवाद से कोई सीधा संबंध नहीं था।

इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए निर्दोष लोगों को फंसा रही है।

वीआईपी नेता का बयान

इस मामले को लेकर Dev Jyoti ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसमें पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब मछली विक्रेताओं के साथ अन्याय किया जा रहा है और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की है और न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

निष्पक्ष जांच की मांग

वीआईपी नेता ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लोगों की नाराजगी साफ देखी जा रही है और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा में है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

आम लोगों में डर और आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों में डर का माहौल भी देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह पुलिस का रवैया रहा तो छोटे कारोबारियों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा।

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